मैथिली विद्यापति गीत ...

माधव कि कहब सुन्दरि रुपे।
कतन जतन बिहि आनि समारल, देखल नयन सरूपे।।

पल्लव-राज चरन-युग सोभित, गति गजराजक भाने।
कनक-कदलि पर सिंह समारल, तापर मेरु सामने।।

मेरु उपर दुइ कमल फुलायल, नाल बिना रूचि पाई।
मनि-मए हार धार बहु सुरसरि, तें नहि कमल सुखाई।।

अधर बिम्ब सन, दसन दाड़िम-बीजु, रवि ससि उगथिक पासे।
राहु दूर बसु निअरे न आबथि, तें नहि करथि गरासे।।

सारँग नयन बयन पुनि सारँग, सारँग तासु समधाने।
सारँग ऊपर उगल दस सारँग, केलि करती मधु पाने।।

भनइ विद्यापति सुन बर जौबति, एहन जगत नहि आने
राजा सिवसिंह रूपनारायण, लखिमा देइ पप्रतिभाने।।




जोवन रतन अछल दिन चारि।
तावे से आदर कएल मुरारि।।

आबे भेल झाल कुसुम रस छूछ।
बारि बिहुन सर केओ नहि पूछ।।

हमरि ए बिनती कहब सखि रोए।
सुपुरुष नेह अंत नहि होए।।

जाबे से धन रह अपना हाथ।
ताबे से आदर कर संग साथ।।

धनिकक आदर सबतहु होए।
निरधन बापुर पूछ नहि कोए।।

भनइ विद्यपति राखब सील।
जओं जग जीबिअ नवओ निधि सील।।

स्वर : रंजना झा !!

Saturday, September 26, 2009

Durga Bhajan - Ram Babu Jha, Suresh Pankaj, Sunil Kumar Jha


दुर्गा भजन - राम बाबु झा, सुरेश पंकज, सुनील कुमार झा
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०१ सब विपिदा मात हरु - राम बाबु झा
०२ हमरा साथ कहिया मेल - सुरेश पंकज
०३ हमर आत्मा के किये ने - सुरेश पंकज
०४ भुकल प्यासल ऐलौं - सुनील कुमार झा
०५ हमर बस जा रहैत भवानी - सुरेश पंकज
०६ विनती करय छी माँ जग जननी - राम बाबु झा
०७ शरण तोहर एलौ - सुरेश पंकज
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|| हवा के संग रहना
मोजों के साथ चलना
जिन्दगी कुछ ऐसी हो के
जिन्दगी के हर रंग में रंगना ||

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